अलीगढ़ जनपद में जादौन क्षत्रियों के गांव।
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अखिल भारतीय जादौन क्षत्रिय फोरम (पंजी)
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जय यदुवंश जय श्री कृष्ण श्री कृष्ण जी श्री बज्रनाभ जी अखिल भारतीय जादौन क्षत्रिय फोरम (पंजी) नमस्कार साथियो दोस्तो इस संगठन को बनाने का उद्देश्य समस्त भारत में रह रहे जादौन क्षत्रिय भाइयों को एक मंच पर लाना आपसी परिचय इतिहास की जानकारी एवं सामाजिक कुरीतियों के बारे में जानकारी देने जैसे विषयों को लेकर किया गया है। इन सभी उद्देश्...
जादों क्षत्रियों के गोत्र, उपगोत्र/कुल
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जादों क्षत्रियों के गोत्र, उपगोत्र / कुल दोस्तों जादों क्षत्रियों के कुलों को जानने के लिए आप ऊपर लिखे हुए नीले अक्षरों में जादों क्षत्रियों के गोत्र उप गोत्र कुल को क्लिक करें उससे पूरी फाइल खुल जाएगी धन्यवाद डी पी सिंह जादौन 9555387215 इसके अलावा आपके पास कोई जानकारी हो तो कृपया मुझे बताएं मैं उसे ऐड कर दूंगा।
इतिहास की कुछ प्रमुख जौहर की घटनाएं
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साथियों इतिहास में जब भी जौहर की बात आती है तो सबसे पहले हमारे जेहन में रानी पद्मावती का नाम आता है आज मैं आपको बताता हूं कि रानी पद्मावती ने इस प्रथा को कायम रखा यह प्रथा पहले से ही हमारे क्षत्रिय समाज में मौजूद थी। अब मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूं के पहले जौहर कब हुआ और रानी पद्मावती के बाद भी जौहर कब-कब हुए। 1- ईस्वी सन् 1046 में यदुवंशी राजा महाराज विजयपाल और अबू बकर कंधारी के बीच कनाबर बयाना और बेर के मध्य युद्ध हुआ युद्ध में महाराज विजयपाल की जीत हुई और वहां से सैनिक दुश्मन के झंडे लेकर खुशी में किले की तरफ दौड़ पड़े किले के रक्षकों ने दूर से दुश्मन के झंडे देखें और अनुमान लगाया कि युद्ध में महाराज वीरगति को प्राप्त हुए हमारी हार हुई और यह सोच कर उन्होंने महल में रह रही सभी क्षत्राणियों का जौहर करवा दिया और महल को आग के हवाले कर दिया जब सैनिक दुश्मनों के झंडे लेकर नजदीक आए तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ उसके बाद महाराज विजयपाल आए उन्हें इस बात का बहुत गहरा सदमा लगा यह कैसा जोहर था जो युद्ध जीतकर भी हुआ इससे दुखद घटना और कोई नहीं हो सकती। संदर्भ - 1-पूगल का इतिहास पृष्...