इतिहास की कुछ प्रमुख जौहर की घटनाएं

 

साथियों इतिहास में जब भी जौहर की बात आती है तो सबसे पहले हमारे जेहन में रानी पद्मावती का नाम आता है आज मैं आपको बताता हूं कि रानी पद्मावती ने इस प्रथा को कायम रखा यह प्रथा पहले से ही हमारे क्षत्रिय समाज में मौजूद थी।
अब मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूं के पहला जौहर कब हुआ और रानी पद्मावती के बाद भी जौहर कब-कब हुए।
1- ईस्वी सन् 1046 में यदुवंशी राजा महाराज विजयपाल और अबू बकर कंधारी के बीच कनाबर बयाना के मध्य युद्ध हुआ युद्ध में महाराज विजयपाल की जीत हुई और वहां से सैनिक दुश्मन के झंडे लेकर खुशी में किले की तरफ दौड़ पड़े। किले के रक्षकों ने दूर से दुश्मन के झंडे देखें और अनुमान लगाया कि युद्ध में महाराज वीरगति को प्राप्त हुए हमारी हार हुई और यह सोच कर उन्होंने महल में रह रही सभी क्षत्राणियों का जौहर करवा दिया और महल को आग के हवाले कर दिया जब सैनिक दुश्मनों के झंडे लेकर नजदीक आए तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ उसके बाद महाराज विजयपाल आए उन्हें इस बात का बहुत गहरा सदमा लगा यह कैसा जोहर था जो युद्ध जीतकर भी हुआ इससे दुखद घटना और कोई नहीं हो सकती।
संदर्भ - 1-पूगल का इतिहास पृष्ठ 76 लेखक हरि सिंह भाटी।
     2- यदुवंश का इतिहास लेखक महावीर सिंह      यदुवंशी
2- ये जौहर जैसलमेर के ढाई साके और जौहर में से एक है जो 1296 से लेकर 1316 के बीच अलाउद्दीन खिलजी द्वारा रावल राजा जैत सिंह के पुत्र मूलराज प्रथम के शासनकाल में हुआ।
3- कुछ इतिहासकार राजस्थान के रणथंबोर दुर्ग में रंगारानी के जल जौहर को राजस्थान का पहला जौहर मानते हैं यहां अलाउद्दीन खिलजी द्वारा राजा हमीर देव को हराने के बाद 11 जुलाई 1301 को रंगारानी ने अपने महल की सभी महिलाओं के साथ जल में डूब कर अपने प्राण त्याग दिए थे।
3- रानी पद्मावती पत्नी राजा रतन सेन राज्य चित्तौड़ 26 अगस्त 1303 को आक्रांता खिलजी के आक्रमण के बाद जौहर किया।
4- 1311 में जालौर किले पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद राजा का कान्हड़ देव और वीरमदेव की मृत्यु के बाद 1584 महिलाओं ने जौहर किया।
5- ये जौहर 1351 से 1388 के बीच फिरोजशाह तुगलक द्वारा जैसलमेर के राजा रावल दूदा पर आक्रमण के समय हुआ।
6- ये जौहर 1423 में गागरोण किले पर मांडू के सुल्तान होशंग शाह के आक्रमण के बाद राजा अचलदास खींची की मृत्यु हुई और रानियों ने जौहर किया।
7- ये शाका 1444 में गागरोण किले में ही माडू सुल्तान महमूद खिलजी द्वारा आक्रमण के समय बुआ यह लड़ाई राजा अचलदास खींची के पुत्र पाल्हणसी के साथ हुई थी जिसमें पाल्हणसी की मृत्यु हुई और रानियों ने जौहर किया

8 - 14वीं शताब्दी में तुगलक वंश के मुस्लिम शासकों ने साम्राज्य विस्तार के दौरान रेवल गढ़ पर हमला किया था. उस समय यहां परमार वंशीय राजा रघुवंश सिंह हाड़ा का शासन था. युद्ध में राजा वीरगति को प्राप्त हुए 

राजा की मृत्यु के बाद किले में मौजूद क्षत्राणियों ने हार नहीं मानी. रानी चंद्रावती कुंवर के नेतृत्व में महिलाओं ने आक्रांताओं से मुकाबला किया. हालांकि विशाल सेना के सामने पराजय निश्चित जानकर क्षत्राणियों ने जौहर का निर्णय लिया.

700 से अधिक क्षत्राणियों ने किया जौहर : महल के नीचे अग्निकुंड प्रज्ज्वलित किया गया. रानी चंद्रावती कुंवर के नेतृत्व में लगभग 700 से अधिक क्षत्राणियों ने सज-धज कर, कुलदेवी की पूजा कर और ‘जय भवानी’ का उद्घोष करते हुए सामूहिक रूप से अग्निकुंड में कूदकर जौहर किया. यह घटना बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी जौहर गाथाओं में से मानी जाती है.
9- रानी कर्णावती पत्नी राणा संग्राम उर्फ राणा सांगा राज्य चित्तौड़ 1535 में बहादुर शाह के आक्रमण के बाद जौहर किया।
10-  यह केवल शाका था इसमें 1550 में कंधार के उमर अली ने भाटी राजा लूणकरण को धोखे से मार दिया था लेकिन युद्ध में भाटियों की जीत हुई थी इसलिए रानी ने जौहर नहीं किया था इसे आधा शाका के नाम से भी जाना जाता है।

11- एक साका और जौहर 1565 में बाड़मेर जिले के सिवाणा पर अकबर की ओर से मोटा राजा उदय सिंह के आक्रमण के वक्त हुआ जिसमें सिवाणा के शासक वीर कल्ला रायमलोत की मौत हुई और रानियों ने जौहर किया।

11- रानी फुलकुवर पत्नी फतेह सिंह चूड़ावत राज्य चित्तौड़ अकबर के आक्रमण के समय 1567 में जोहर किया।
इस कड़ी में अभी और भी बहुत सारे शाका और जोहर हुए हैं जिनको धीरे-धीरे जोड़ा जाएगा।
यहां केसरिया, जौहर और शाका का फर्क बताना जरूरी समझता हूं केसरिया सैनिक या राजा अर्थात मर्द करते हैं कि आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे पीछे नहीं हटेंगे और जोहर स्त्रियां करती हैं जब युद्ध में हार निश्चित हो जाती है तो महल की सभी स्त्रियां खुद को आग या पानी के हवाले करके जान दे देती हैं और केसरिया और जौहर दोनों हो जाते हैं तो इसे शाका कहा जाता है।

डी पी सिंह जादौन 

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